Sunday 6 May 2012

Searching for myself

आज  खुद को ढून्ढ लाने को जी चाहता है 
इस  भीड़ से दूर जाने को जी चाहता है 
इस शोर में खुद की ही आवाज़  कहीं खो सी गयी है 
अपनी आवाज़  पहचानने को जी चाहता है 

Facebook के इस  ज़माने में दोस्तों से वास्ता बस  status message तक  का ही रह गया है।
सोचती हूँ, कभी सामने आये तोह क्या कर पाऊँगी कोई भी बात  उनसे? 
उन  सब  के साथ  बैठ कर हंसने गाने को जी चाहता है।

किसी और के सपनो की तामील  में इतना डूब गयी हूँ, 
की खुद की सोचु का किनारा कहीं मिल  नहीं  रहा है ।
इस से पहले की खुद को पाने की चाह भी ना मिले ।
खुद से खुद की एक  बार  फिर पहचान  कराने को जी चाहता है। 


खुद की तलाश  में